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Dr. Avinash Tank
Festival 15 Jan 2026 1 min read

Makarsakranti: Celebration of Astronomical Event in India

Written & reviewed by Dr. Avinash Tank, MBBS · MS (General Surgery) · MCh (Surgical Gastroenterology, SGPGIMS)
Makarsakranti: Celebration of Astronomical Event in India
Reading Time: 3 minutes

Makarsakranti: Celebration of Astronomical Event in India.

उत्तरायण (मकर संक्रांति) — विज्ञान और मौसमी प्रभाव

भारत में मकर संक्रांति / उत्तरायण सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और सूर्य की खगोलीय गति से जुड़ा एक वैज्ञानिक तथ्य भी है। यह ब्लॉग आपको उत्तरायण से जुड़ी वैज्ञानिक प्रक्रियाएँ, भू-गोल विज्ञान, मौसम परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को सरलता से समझाएगा—with वैज्ञानिक (PubMed) संदर्भ.

🌞 

1. उत्तरायण: सूर्य की खगोलीय गति

☀️ पृथ्वी का झुकाव और सूर्य की दिशा

हमारी पृथ्वी का अक्ष लगभग 23.5° पर झुका हुआ है। इसी झुकाव के कारण पृथ्वी अपने सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते समय सूर्य की किरणें अलग-अलग समय पर उत्तरी या दक्षिणी गोलार्ध पर अधिक सीधी पड़ती हैं। इसके परिणामस्वरूप हमें मौसम, दिन की अवधि और कृषि ऋतु में बदलाव दिखाई देता है। 

☀️ उत्तरायण और दक्षिणायन

  • उत्तरायण (Uttarayana): जब सूर्य दक्षिणा से उत्तर दिशा की ओर जाने लगता है।
  • दक्षिणायन (Dakshinayana): जब सूर्य उत्तर गोलार्ध से दक्षिण की ओर जाने लगता है।
    👉 यह परिवर्तन वास्तविक रूप से विंटर सोलस्टाइस (21-22 दिसंबर) के करीब होता है—जब उत्तरी गोलार्ध सबसे अधिक दक्षिण की ओर झुका होता है और फिर सूर्य की दिशा बदलती है।  

📌 ध्यान दें: पारंपरिक हिन्दू पंचांग में “मकर संक्रांति” तब मनाई जाती है जब सूर्य नक्षत्रों के सापेक्ष मकर राशि में प्रवेश करता है—इसलिए यह हर साल 14 या 15 जनवरी को आता है। 

🌏 

2. उत्तरायण से मौसम और दिन-रात का विज्ञान

🌤️ दिन और रात की अवधि में बदलाव

उत्तरायण के शुरू होने के बाद, उत्तरी गोलार्ध में:

✔️ दिन की अवधि धीरे-धीरे बढ़ती है

✔ रातें छोटी होती हैं

यह व्यवहारिक रूप से सूर्य की दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ती हुई पथ के कारण होता है, जिससे सूर्य हर रोज थोड़ी देर अधिक ऊँचाई पर दिखाई देने लगता है। 

🧬 

3. सूर्य का प्रकाश और मानव स्वास्थ्य

💡 विटामिन-D संश्लेषण

सूरज की UVB किरणें हमारी त्वचा में विटामिन-D का निर्माण करती हैं—जो हड्डियों, प्रतिरक्षा प्रणाली और कई अन्य जैविक कार्यों के लिए आवश्यक है। 

🔍 PubMed आधारित वैज्ञानिक निष्कर्ष:

  • सूर्य की प्रकाश ऊर्जा का स्तर और दिन की लंबाई मौसम और ऋतु के अनुसार बदलते रहते हैं। इसके कारण विटामिन-D का उत्पादन भी ऋतु-अनुकूल बदलता है।  
  • शोधों से पता चला है कि गर्मियों या अधिक दिन वाले मौसमों में UVB किरणों की मात्रा अधिक होती है, जिससे विटामिन-D का उत्पादन बढ़ता है, जबकि शीत काल में यह कम होता है।  

📌 यही कारण है कि उत्तरायण शुरू होने के समय (दिन बढ़ने के साथ) सूर्य के प्रकाश का मानव शरीर पर सकारात्मक प्रभाव और अधिक होता है।

🧠 

4. प्रकाश और मनोवैज्ञानिक प्रभाव

🌞 दिन की अवधि और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य के बीच भी वैज्ञानिक सम्बन्ध है।

PubMed आधारित अनुसंधान बताते हैं कि:

✔️ दिन के उजाले का स्तर हमारे हार्मोनल चक्र (जैसे मेलाटोनिन) पर असर डालता है।

✔️ दिन की अवधि कम होने पर (शीत ऋतु) मेलाटोनिन स्तर उच्च रहते हैं और भाव-भावना पर असर पड़ सकता है।

✔️ दिन की अवधि बढ़ने से प्राकृतिक प्रकाश हमारी नींद-जागरण, मूड और ऊर्जा पर अनुकूल प्रभाव डालता है। 

👉 इसका मतलब यह है कि उत्तरायण के दौरान और इसके बाद दिन बढ़ना, ज़्यादा प्राकृतिक प्रकाश और लंबी दिनचर्या से हमारी फिज़ियोलॉजिकल और साइकोलॉजिकल स्थितियाँ प्रभावित होती हैं।

🌿 

5. वैज्ञानिक निष्कर्षों का सार

चलिए अब वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संक्षेप में उत्तरायण के मुख्य वैज्ञानिक पहलुओं को समझें:

🔹 पृथ्वी का झुकाव और परिक्रमा

पृथ्वी का अक्ष 23.5° पर झुका है—जिसकी वजह से सूर्य की दिशा बदलती दिखती है और हम मौसम व दिन-रात के बदलाव अनुभव करते हैं। 

🔹 उत्तरायण की शुरुआत

वास्तव में सूर्य का उत्तर की ओर बढ़ना लगभग 21-22 दिसंबर (विंटर सोलस्टाइस) से शुरू होता है। 

🔹 दिन-रात की वृद्धि

उत्तरायण के दौरान दिन की अवधि बढ़ती है, जिससे मौसम, तापमान और जीवन में ऊर्जा का परिवर्तन दिखाई देता है। 

🔹 मानव शरीर पर सूर्य की भूमिका

सूर्य का प्रकाश विटामिन-D का उत्पादन और हार्मोनल संतुलन दोनों को प्रभावित करता है — जो शरीर की प्रतिरक्षा, मूड और स्वास्थ्य को बदलता है। 

🌞 

6. निष्कर्ष

मकर संक्रांति और उत्तरायण का वैज्ञानिक पहलू यह बताता है कि:

✔️ यह पर्व पृथ्वी-सूर्य सम्बन्ध तथा मौसमीय परिवर्तनों का प्राकृतिक उत्सव है।

✔️ सूर्य की दिशा में बदलाव से दिन बढ़ते हैं और प्राकृतिक प्रकाश शरीर व मन पर असर डालता है।

✔️ सूर्य के प्रकाश का सही उपयोग हमें विटामिन-D और ऊर्जा के स्तर को संजोने में मदद करता है।

 

Dr. Avinash Tank
Medically reviewed by
Dr. Avinash Tank — MCh Surgical Gastroenterology

Super-specialist GI, bariatric & cancer surgeon. SGPGIMS (India's premier GI centre) + advanced training in Japan & South Korea. Read full profile →

Last reviewed: July 2026

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